विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठन ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार अपने सामने बचपन से ही एक उच्चतम ध्येय रखकर काम करते रहे। संघ-कार्य का जैसे-जैसे विस्तार हुआ, समाज में देशभक्ति, आत्मविश्वास, एकता की भावना और राष्ट्रीय गौरव-बोध जैसे गुणों की वृद्धि हुई है। डॉ. हेडगेवार ने राष्ट्र-निर्माण के लिए कटिबद्ध असंख्य जीवनदानी विभूतियों को प्रेरित किया, जिनकी साधना और तपस्या की नींव पर खड़ा संघ वैश्विक स्तर पर सेवा-संस्कृति-जागरण के महती कार्य कर रहा है। संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर उपाख्य ‘श्रीगुरुजी’ ने लगभग 33 वर्ष तक संघ प्रमुख के नाते न केवल संघ को वैचारिक आधार प्रदान किया, उसके संविधान का निर्माण कराया, उसका देश भर में विस्तार किया, पूरे देश में संघ शाखाओं को फैलाया, बल्कि इस दौरान देश विभाजन, भारत की आजादी, गांधी-हत्या, भारत-पाकिस्तान के बीच तीन-तीन युद्ध (कश्मीर सहित) एवं चीन द्वारा भारत पर आक्रमण जैसी ऐतिहासिक घटनाओं के भी वे साक्षी बने और उस इतिहास के निर्माण में लगातार हस्तक्षेप भी किया। प्रस्तुत पुस्तक में दोनों सरसंघचालकों के जन्म से लेकर उनके महापरिनिर्वाण तक की समूची विकास-यात्रा रोचक प्रश्नोत्तर रूप में दी गई है, जो भारत के इतिहास को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करती है।
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