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पौराणिक नक्षत्र ज्योतिष: वेदों, पुराणों, उपनिषदों, तैत्तिरीय ब्राह्मण तथा महाभारत में वर्णित नक्षत्रों के देवताओं द्वारा एक वृहद शोध - Softcover

Aniket Gupta

 
9789371000185: पौराणिक नक्षत्र ज्योतिष: वेदों, पुराणों, उपनिषदों, तैत्तिरीय ब्राह्मण तथा महाभारत में वर्णित नक्षत्रों के देवताओं द्वारा एक वृहद शोध

Synopsis

आज के समय में, ज्योतिषीय जानकारियों का उपयोग सरलता और व्यावहारिकता के आधार पर किया जाता है। लोग अक्सर आसान और त्वरित उपायों की ओर आकर्षित होते हैं, जिसके कारण नक्षत्रों के गहन अध्ययन की आवश्यकता महसूस नहीं होती। इसी कारण से, ज्योतिष में नक्षत्रों का अध्ययन कम हो गया है।

नक्षत्रों की स्थिति, चाल और गोचर में अंतराल बहुत अधिक होता है। नक्षत्रों का प्रभाव बहुत सूक्ष्म और दीर्घकालिक होता है, जो ज्योतिषीय रूप से साधारण व्यक्ति के लिए समझना और विश्लेषण करना कठिन हो सकता है। आधुनिक ज्योतिष में लोग तत्काल प्रभावों और समाधान के लिए अधिक आकर्षित होते हैं, जबकि नक्षत्रों के प्रभाव का अध्ययन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से किया जाता है।

साधारण ज्योतिषी को नक्षत्रों का ज्ञान नीरस, उबाऊ तथा कठिन महसूस होता है। इसके अतिरिक्त बाजार में उपलब्ध नक्षत्रों पर समस्त पुस्तकों में नक्षत्रों के देवता तो बताए गए हैं, परंतु वह क्यों उस विशेष नक्षत्र के देवता हैं और उसका क्या प्रभाव है, यह नहीं बताया गया है।

अपनी ज्ञान सुधा को परिपूर्ण करने के लिए लेखक ने नक्षत्र के देवताओं पर वेदों, तैत्तिरीय ब्राह्मण, उपनिषदों, पुराणों तथा महाभारत में वर्णित नक्षत्रों के देवताओं पर गहन अध्ययन किया है।

इस अनुपम पुस्तक में नक्षत्र के देवताओं के क्रियाकलापों के आधार पर जातक के जीवन पर ग्रहों के प्रभावों के साथ-साथ आध्यात्मिक तथा मनोवैज्ञानिक समाधानों का भी विस्तार में वर्णन मिलेगा।

एक खण्ड अत्यंत आसान व दिलचस्प भाषा में नक्षत्रों के आधुनिक अनुसंधानों पर दिया गया है जो किसी भी पाठक को नक्षत्रों के विषय में वे जानकारियां उपलब्ध कराता है जो उसको गहन अध्ययन के लिए प्ररित करेगा।

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About the Author

लेखक ने 1990 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद कुछ साल नौकरी की, लेकिन पिता जी के कारण कुछ साल बाद अपने पारिवारिक पेशे पुस्तक विक्रय में आना पडा। शीघ्र ही अपना खुद का प्रकाशन शुरू किया, जिसमें जूनियर, हाईस्कूल, इण्टरमीडिएट और डिग्री लेवल तक की लगभग 250 पुस्तकों का लेखन स्वयं किया। इस कारण विभिन्न विषयों में लगातार अध्ययन करने का जुनून धीरे धीरे दीवानगी की हद तक पहुँच गया। कहते हैं प्रारब्ध अपना कार्य जरूर करेगा। लेखक की कुंडली में ग्रहों की स्थिति तथा शनि की महादशा उसे धीरे-धीरे ज्योतिष विज्ञान की ओर खींचने लगी। 2010 से ज्योतिष अध्ययन की यात्रा शुरू हुई, और आज तक अनवरत जारी है।

ज्योतिष की सैंकड़ों पुस्तकों का अध्ययन करते समय पाश्चात्य ज्योतिष की ओर जिज्ञासा बढ़ी क्योंकि ये पुस्तकें बाज़ार में हिंदी भाषा में उपलब्ध नहीं हैं। आम तौर पर हमारे देश के ज्योतिषी पाश्चात्य ज्योतिष को केवल 'सन साइन और मून साइन' पर आधारित मानते हैं और उसको गंभीरता से नहीं लेते हैं। बहुत अधिक गहराई से साठ से अधिक पाश्चात्य पुस्तकें पढ़कर ज्ञात हुआ कि पाश्चात्य ज्योतिष ने भी वैदिक ज्योतिष को अपना कर तथा उसका प्रयोग कर बहुत कुछ शोध किया है।

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