विद्युत लाइन: Electrical Lines (Hindi Edition) - Softcover

रनवीर सिंह

 
9798888338070: विद्युत लाइन: Electrical Lines (Hindi Edition)

Synopsis

•       विद्युत लाइन (फीडर) की पहचान लाइन के वोल्टेज से की जाती है ।  •       विभिन्न वोल्टेज की लाइन विद्युत आपूर्ति के लोड (भार) क्षमता तथा दूरी के मापदंडों के अनुसार होती है । •       एक ही पावर की आपूर्ति के लिए अधिक वोल्टेज की लाइन में कम लॉस (हानि) तथा कम वोल्टेज की लाइन में अधिक लॉस (हानि) होते हैं । लाइन लॉस (हानि) करेंट (धारा) के वर्ग (स्क्वायर) समानुपाती होते हैं । •      लाइन में होने वाले व्यवधान (ब्रेक डाउन) मुख्यतः फेज के अर्थ (भू-संपर्क) से संपर्क (अर्थ फाल्ट), फेज से फेज के संपर्क (ओवर करेंट फाल्ट), अथवा दोनों (अर्थ फाल्ट और ओवर करेंट फाल्ट) तथा ओपन सर्किट फाल्ट ही के कारण होते हैं । विद्युत लाइन मौसम (वर्षा, आंधी, तूफान, चक्रवात, बाढ़, आगजनी, घटना, आन्दोलन) के कारण भी विशेषत: प्रभावित होती हैं । •      विद्युत आपूर्ति व्यवस्था सुधार की दृष्टि से तीन प्रकार के संधारण किए जाते है –  •       1- पीरिओडिकमेंटीनेंस/समय बद्ध संधारण – आमतौर पर एक वर्ष में दो बार (मानसून के बाद या दिवाली से पहले और दूसरा प्री मानसून/मानसून से पहले)  •       2 – करेक्टिव मेंटीनेंस/सुधारात्माक संधारण – जब कभी विद्युत व्यवस्था में ऐसी कमियाँ आ जाती हैं और समय रहते उनको सुधारा नहीं गया तो आगे आने वाले समय में व्यवधान होगा अत: ऐसे व्यध्यानों को पूर्व से ही सुधार लिया जाता है ।  •       3 - ब्रैक डाउन मेंटीनेंस/व्यवधान संधारण – जब विद्युत व्यवस्था फाल्ट के कारण बाधित (बंद) हो गई तब फाल्ट को दूर कर/निकालकर ही व्यवस्था नियमित होती है । पहले दोनों सुधार कार्यों में विद्युत व्यवस्था ब्रैक डाउन नहीं होती अपितु शट्डाउन लेकर सुधार कार्य किया जाता है ।  

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