अविरल मन: MOUN KE AKAS (Hindi Edition) - Softcover

धर्मेश कुमार रवि

 
9798903429707: अविरल मन: MOUN KE AKAS (Hindi Edition)

Synopsis

क्या आपने कभी आईने के सामने ठहरकर उस शख्स से बात की है, जो दुनिया की भीड़ में कहीं खो गया है? 'अविरल मन' केवल शब्दों का मेल नहीं, बल्कि शोर से सुकून की ओर एक मुसाफिर का सफर है। यह संग्रह लेखक के अंतर्मन के उन एकांत क्षणों की उपज है जहाँ 'अनकहा दर्द' शब्दों का जामा पहनकर कागज़ पर उतरा है।  मुख्य आकर्षण:- साहित्य और सेवा का संगम: बिहार के सिवान की मिट्टी की सोंधी खुशबू और सीमा सुरक्षा बल (BSF) की वर्दी के अनुशासन के बीच रची गई ये कविताएँ मानवीय संवेदनाओं के उन हिस्सों को छूती हैं जिन्हें हम अक्सर 'अनकहा दर्द' कहकर छोड़ देते हैं।  आत्म-साक्षात्कार की यात्रा: संग्रह की शुरुआत 'आईने के सम्मुख' से होती है, जहाँ इंसान दुनिया के मुखौटों को उतारकर अपनी असलियत से रूबरू होता है। संघर्ष और निरंतरता: 'चल रे मनवा' जैसी पंक्तियाँ हमें याद दिलाती हैं कि चाहे रास्ते में कितने ही पत्थर क्यों न हों, एक नदी की तरह हमें बस 'अविरल' बहते रहना है। यथार्थ का चित्रण: 'तफ़्तीश' और 'बेसहारों की दुनियाँ' जैसी रचनाओं के माध्यम से लेखक ने सामाजिक विसंगतियों और गरीबी-अमीरी के फासलों को बड़ी ही बेबाकी से उकेरा है।  पाठकों के लिए: यह पुस्तक हर उस दिल के लिए है जो संघर्षों के बीच भी रुकना नहीं, बल्कि नदी की तरह बहना चाहता है। यदि इन कविताओं को पढ़ते हुए आपका थका हुआ मन फिर से 'अविरल' होकर चलने की हिम्मत जुटा सके, तो लेखक का यह सृजन सार्थक होगा।  

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