समय के पड़ाव (Hindi Edition) - Softcover

डॉ. गोपाल दत्त

 
9798903627127: समय के पड़ाव (Hindi Edition)

Synopsis

“समय के पड़ाव” जीवन की उस निरंतर यात्रा का काव्यात्मक दस्तावेज़ है, जिसमें मनुष्य हर क्षण कुछ खोता है, कुछ पाता है और बहुत कुछ अपने भीतर सँजो कर आगे बढ़ता है। यह संग्रह किसी एक घटना, एक विचार या एक भाव तक सीमित नहीं है, बल्कि समय के साथ बदलते सामाजिक परिवेश, सत्ता के ठेकेदारों की भूमिका, सामाजिक न्याय, और संवेदनाओं के विविध अनुभवों को शब्द देने का एक विनम्र प्रयास है।यह कविता संग्रह समय के साथ उभरे भावों और प्राप्त अनुभवों को समेटे है जिन्हें हम अक्सर महसूस तो करते हैं, पर जीवन की भाग दौड़ में कहीं छोड़ आते हैं, अथवा इन्हें समुचित स्थान नहीं दे पाते, जैसे- अकेलापन, असहमति, स्मृतियाँ, बिछोह, उम्मीद, प्रतिरोध, और भीतर पलती एक सशक्त न्याय की आवाज।इस संग्रह की कविताएँ “समय जब गुजरता है” के उस एहसास से जन्म लेती हैं, जब आदमी बाहरी दुनिया से अधिक अपने भीतर घट रही हलचलों को सुनने लगता है। इसी तरह “पिता नहीं, पहचान हूँ मैं” और “पिता और पहाड़” जैसे शीर्षक उस जड़ से जुड़े होने का भाव रचते हैं, जो व्यक्ति को हर टूटन के बाद भी खड़ा रहने की ताकत देता है। इस संग्रह की कुछ कविताएं- “माँ तू जा काम पर”, “में पहाड़ बोल रहा हूँ”, “हम भी पेड़ बनेंगे” और “ठूंठ खड़े पेड़ों से”, “अकेला जब होता है मन”, “मन कितना भी भारी हो”, आदि।“समय के पड़ाव” संग्रह, दरअसल कविताओं का ही नहीं, बल्कि भावनाओं और जीवन की वास्तविकताओं का दस्तावेज है। यदि इन कविताओं में पाठकों को अपना कोई दर्द, कोई सवाल, कोई मौन या कोई उम्मीद दिखाई दे, तो यही इस संग्रह की सार्थकता होगी। (गोपाल दत्त)

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