Synopsis
पं. चंद्रधर शर्मा गुलेरी उन महान् रचनाकारों और मनीषियों में अग्रगण्य हैं जिन्हें ‘हिंदी का निर्माता’ कहा जाता है। खड़ी बोली हिंदी के प्रारंभिक काल में गुलेरी ने कहानी और निबंध् सहित अनेक विधओं में संवेदना व शिल्प की बुनियाद तैयार की। लेखक, पत्रकार, विमर्शकार, अनुसंधनकर्ता और शास्त्राज्ञ आदि अनेक रूपों में गुलेरी ने भाषा और साहित्य को समृद्ध किया। ‘गुलेरी रचनावली’ (दो खंड) कालजयी साहित्यकार पं. चंद्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा विरचित साहित्य का प्रामाणिक संकलन है। डाॅ. मनोहर लाल ने अत्यंत परिश्रम, विद्वत्ता व निष्ठा के साथ इस रचनावली का संपादन किया है। इसमें कहानी, निबंध्, शोध्, पांडुलिपि विवरण, संस्मरण, साक्षात्कार, पौराणिक विवेचन, लोककला, राजनीति, धर्म, साहित्य समीक्षा, पत्रकारिता, काव्य, जीवन चरित, भूमिका लेखन, भाषा विवेचन, अनुसंधन, इतिहास, पुरातत्त्व, विज्ञान, ललित निबंध्, संपादकीय, पत्र साहित्य में निहित गुलेरी की रचनाओं को संजोया गया है। उनके व्यक्तित्व का विशद विवेचन है। उनके द्वारा संस्कृत और अंग्रेजी में लिखी रचनाएं हैं। गुलेरी इस बात के उदाहरण हैं कि किसी लेखक की केवल एक रचना उसे अमरत्व प्रदान कर सकती है। ‘उसने कहा था’ एक ऐसी अपूर्व अविस्मरणीय कहानी, जिसने भारतीय साहित्य में गुलेरी को अक्षय कीर्ति प्रदान की। अज्ञेय के शब्दों में, ‘गुलेरी जी ने कुल तीन कहानियां लिखीं, पर उन तीनों में से एक ऐसी सर्वांग सुंदर रचना हुई कि कोई भी कहानी संग्रह उसे लिए बिना प्रतिनिध्त्वि का दावा नहीं कर सकता।’ यह कहानी है ‘उसने कहा था।’ मनोहर लाल द्वारा सुसंपादित ‘गुलेरी रचनावली’ का ऐतिहासिक महत्त्व है। पाठक, आलोचक, शोध्कर्ता—सबके लिए संग्रहणीय।
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