“फर्जी मुठभेड़! यह क्या कह रहे हैं आप?” पति की बात सुन कर विस्मय से श्रीमती खान पति के चेहरे पर कत्थक कर रहे रहस्यमय भावों को पढ़ने की प्रयत्न करने लगीं, “क्या पुलिस लोगों को जिन्दा पकड़ लेने के बाद उसे गोली मार देगी? … क्या जनता की रक्षा करने वाली पुलिस उन्हीं पर इतना बड़ा जुल्म करेगी?” *** “उस अंग्रेज को कम से कम इतनी तमीज अवश्य थी कि उसने गांधीजी के दूसरे गाल पर थप्पड़ नहीं मारा … उस अंग्रेज की जगह कोई स्वदेशी ऑफिसर होता तो बूढ़े गांधीजी की हड्डी – पसली तोड़ कर रख देता!” *** “हमदोंनो जवान हैं … हमदोंनो एक - दूसरे की तरफ आकर्षित हुए … सेक्स तुम भी चाहती थी … मैंने तुम्हारा रेप नहीं किया …” राजीव पूरी तरह खुल चुका था, उसने समन्दर की तरफ इशारा करते हुए कहा, “इसलिए हमें अपनी गलतियां सुधार लेनी चाहिए … प्यार के नाम पर हम इस सागर में डूब कर प्राण नहीं गंवा सकते।” ***