पुस्तक में उनकी स्वयं की स्वतंत्र वकालत के जो फैसले ''सिक्स विक्ट्री नो लौस'' पुस्तक के प्रकाशित होने के बाद हुए हैं उन्हें इस पुस्तक की विषय वस्तु बनाया हैं। अभी तक जो न्यायालय से जारी हुए हैं लेखक उनमें विजय श्री मिली है और अपने पक्षकार को न्याय दिलाने में सफल रहे हैं। यहाॅ यह भी स्पष्ट किया गया है कि हमेशा जीत नहीं होती उसी क्रम में हमें एक मामले में लौस भी हुआ उसका का हवाला हमने किया है। हाॅलाकि मुरैना के मामले में निर्णयं में पूरा केस लडने के वावजूूद हमारा नाम न लिखते हुए जज साहब ने लोकल अधिवक्ता का नाम लेख किया है। क्यांेकि यह मामला जिला न्यायालय मुरैना का था तो लोकल अधिवक्ता साथ में रखना आवश्यक होता है, जज साहब ने लोकल अधिवक्ता का लिखा हैं। हम इस बुराई से दूर नहीं रहना चाहते और पूरी जिम्मेदारी लेते हैं।