महाराष्ट्र में जन्मीं और वहीं पली-बढ़ीं सबा खान विद्यार्थी जीवन से ही जासूसी, अपराध तथा रहस्य कथाएं पढ़ने की शौक़ीन रही हैं। तीन साल तक उच्च शिक्षण से जुड़ी रहने के पश्चात व्यक्तिगत कारणों से 2015 में पद से त्यागपत्र। तत्पश्चात शौक़ ने लेखन की दिशा में सक्रिय किया और 2017 में ‘चालीसा का रहस्य (डॉo रुनझुन सक्सेना के द सीक्रेट ऑफ़ चालीसा)’ तथा ‘आखिरी दाँव (जेम्स हेडली चेइज़ के वन ब्राइट समर मॉर्निंग)’ के अनुवादों से लोकप्रियता हासिल की। इसी क्रम में 'जैक रीचर' सीरीज़ के विश्व प्रसिद्ध लेखक ली चाइल्ड के उपन्यास 'वन शॉट' का भी अनुवाद। तत्पश्चात रमाकांत मिश्र जी के साथ मिलकर महासमर नामक थ्रिलर श्रृंखला की नीव एवं उस श्रृंखला के दो आरंभिक उपन्यासों क्रमशः 'महासमर: परित्राणाय साधुनाम' एवं 'महासमर-परित्राणाय साधुनाम: सत्यमेव जयते नानृतम' का सहलेखन.