पूनम दुबे की पैदाइश मुंबई में हुई और वहीं से उन्होंने अपने MBA की पढ़ाई भी पूरी की. पेशे से पूनम मार्केट रिसर्चर हैं. बहुराष्ट्रीय रिसर्च फर्म नील्सन में सेवा के पश्चात फ़िलवक्त इस्तांबुल (टर्की) में रह रही हैं और ज़िंदगी के नए मायने तलाश रही हैं. उनमें हमेशा से मानवी रिश्तों और व्यवहार को बारीकी से देखने और समझने का कौतूहल रहा. बतौर मार्केट रिसर्चर दुनिया को देखना, परखना, जानकारियां इकट्ठा करना और फिर उन्हें अपने शब्दों में ढाल देना, इनके पेशे का हिस्सा रहा है और अब उनकी कहानियों का यूनिक सेलिंग पॉइंट भी. ट्रैवल करना, पढ़ना और लिखना उनका पैशन है. अब तक वह चार महाद्वीपों के बीस से भी ज्यादा देशों में ट्रैवेल कर चुकी है. 'चिड़िया उड़' उनकी पहली उपन्यास है जो कि वास्तविक जीवन से प्रेरित है. उत्तर भारत के लोकगीतों में 'चिड़िया' अकसर बेटी के लिये कहा जाता है और बेटियाँ महज परकटी चिड़िया बन के रह जातीं हैं, पर उपन्यास की नायिका कल्पना उड़ती है. पंख फैला कर उसी तरह से जैसे वह बचपन में चिड़िया उड़ खेल खेलते हुए अपने ख़्वाबों में उड़ती थी.