Man Mohan Bhatia
मन मोहन भाटिया
व्यक्तिगत रूप से मुझे हर शैली में लिखना पसन्द है। मैंने शुरुआत सामाजिक कहानियों से की। मैं अपनी कहानियों के पात्र जीवन के इन्द्रधनुषी रंगों से चुनता हूँ जिसमें जवलंत सामाजिक मुद्दे भी हैं, हास्य-व्यंग्य भी है, प्रेम भी है, त्याग भी है, समर्पण भी है, भय भी है, रहस्य भी है, कपोल कल्पना भी है, संस्मरण भी है, घृणा भी है, षड्यन्त्र भी है, अपराध भी है। इसलिए जब भी जीवन का कोई रंग प्रभावित करता हैं उस पर कलम चलती है। मैं हर विधा की पुस्तकें पढ़ता हूँ इसलिए हर शैली में लिखना भी पसन्द है। जीवन में हर रंग का अपना विशेष महत्व है, हमें एक रंग में नहीं बंधना चाहिए। हर रंग और विधा का हमें आनन्द लेना चाहिए। यही कारण है, मेरी कलम विभिन्न रस और रंग में डूबकर निरन्तर चलती रहती है। सब्र से रस के साथ पढ़ता हूँ और सब्र से रस के साथ लिखता हूँ।